शनिवार, अप्रैल 26, 2008

याद है मुझे...
तुमने कहा था.........
इक पुरखार पौधा बनुगा
जहा तुम मुझे हुस्न दोगी
...........तुम्हे मैं पनाह.

रविवार, अप्रैल 06, 2008

अलग


अलग है

ऐसे

क्यो हम

जैसे............

रात और

दिन..........

शुक्रवार, अप्रैल 04, 2008

शाम


बेमहर रात
और बदमिजाज..........
झेल लेने के बाद
शाम तोहफा है
आस्मा का अता किया
शाम को संभालो,
सजाओ,

इसको सवारों,
मसरफ मे अपने लाओ
इससे पहले
के रात इसे अपने जहर से
मार डाले.........
उठो .


आकाश


तुम

आकाश होना चाहते हो
.................हो जाओ
मैं
धरती ही बनू
.........ये मेरी आरजू
फर्क सिर्फ़ इतना है.........
तुम
छाए हो लोगो पर
मैं
बिछी हू लोगो के लिए..............आमीन.

शनिवार, मार्च 29, 2008

एक सुखा पत्ता


हाँ,
हिला तो था कुछ.......
आई तो थी आवाज
खङकने की
तब......
जब मैं गुजर रही थी
तेरी यादो के जंगल से।
ठुंठ kharre hai वहा
हरियाली का नामो-निशा नही
केवल वही-
अकेला था वहा.........

तेरा एहसास लिए
एक सुखा पत्ता
बस..........एक सुखा पत्ता.

बुधवार, मार्च 26, 2008

तुम


जिसमे नींद भर सो न सकी
बरखा की वो रात हो तुम.
कहते-कहते भी कह न सकी
वो अधूरी बात हो तुम.
हाथो को बढ़ा कर छूना जो चाहा
तो दूर हुए एहसास सा तुम.
चांदनी रातो मे तनहा से हम
और गुले-गुलजार हो तुम.
बहुत चाहा के देख लू नजर भर के
लेकिन पलको पे बैठे मेहमा हो तुम.
पन्ने के इक छोर पे लिखी
अपनी कहानी का विराम हो तुम.
कह सको तो कह दो इक बार
मेरे बस मेरे मेहरबा हो तुम.

बुधवार, मार्च 19, 2008

चूडियाँ


इतनी उदास कब थी कलाई मे चूडियाँ ,
ढीली परी है किसकी जुदाई मे चूडियाँ
इस साल भेजे है तोहफे नए -नए
कंगन जुलाई मे तो दिसम्बर मे चूडियाँ "