गुरुवार, सितंबर 13, 2012

तुम चले जाओगे
पर थोड़ा-सा यहाँ भी रह जाओगे
जैसे रह जाती है
पहली बारिश के बाद
हवा मे धरती कि सोंधी-सी गंध......अशोक वाजपयी

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